बिहार चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) न सिर्फ राज्य की राजनीति के लिए, बल्कि देश की राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव दो चरणों में हुआ — पहले चरण में 6 नवंबर को और दूसरे में 11 नवंबर को मतदान किया गया। मतगणना 14 नवंबर को हुई।
यह चुनाव Nitish कुमार की दशकों पुरानी राजनीतिक जर्नी और उनकी सरकार की विकास-कहानी के लिए एक बड़ी परीक्षा था। बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर मतदाता अपना भविष्य तय करने में जुटे थे।
चुनाव के प्रमुख मुद्दे
1. बेरोजगारी और युवा संघर्ष
बिहार में युवा बेरोजगारी (unemployment) एक बड़ा मसला है। कई युवा और पढ़े-लिखे लोग नौकरी न मिलने के कारण दूसरे राज्यों को पलायन करते हैं। पार्टियों ने इसे चुनावी मुद्दा बनाया है और युवाओं को रोजगार देने का वादा किया है।
2. मतदाता सूची में संशोधन
चुनाव से पहले मतदान सूची का Special Intensive Revision (SIR) किया गया, जिसमें लाखों नाम हटाए गए — मृतक, प्रवासी, या डुप्लिकेट वोटर। विपक्ष ने इस कदम पर सवाल भी उठाए हैं, यह कहते हुए कि इससे कुछ वर्गों के मतदाता अनवॉलेटेड रह सकते हैं।
3. विकास की कमी
बिहार विकास की दौड़ में कई मोर्चों पर पीछे है — बुनियादी ढांचा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी अब भी एक बड़ी परेशानी है।
4. कानून-व्यवस्था
राज्य में अपराध, जातिगत हिंसा और राजनीतिक उन्माद जैसे मुद्दे अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। चुनावी वक्त में ये सवाल प्रमुख रहे कि पिछली सरकार ने कानून-व्यवस्था कैसे संभाली।
5. माइग्रेशन (प्रवास)
नौकरी की कमी और विकास की धीमी रफ्तार के कारण बिहार के कई युवा दूसरे राज्यों में काम की तलाश में चले जाते हैं। यह प्रवासन न सिर्फ आर्थिक चुनौती है, बल्कि सामाजिक समस्या भी बन गया है।
मुख्य खिलाड़ी और गठबंधन
• NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन): इसमें भाजपा (BJP), जद (यू) (JD-U), लोक जनशक्ति पार्टी (Ram Vilas) जैसे दल शामिल हैं।
• महागठबंधन (MGB): राजद (RJD), कांग्रेस और कुछ अन्य लेफ्ट पार्टियाँ शामिल हैं।
• तीसरा मोर्चा – GDA (Grand Democratic Alliance): यह नया गठबंधन है जिसमें AIMIM, Azad Samaj Party और अन्य शामिल हैं।
• नई पार्टियाँ: चुनाव 2025 में Indian Inclusive Party (IIP) भी सक्रिय रही, जिसकी नींव हाल ही में हुई थी।
मुख्य उम्मीदवारों में नीतीश कुमार (Nitish Kumar)और तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) की टक्कर को चुनाव की रीढ़ माना गया।
चुनाव आयोग की तैयारी और पारदर्शिता
चुनाव आयोग (ECI) ने इस चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए। उन्होंने 470 से ज्यादा मध्य निरीक्षक तैनात किए हैं, जो मतदान प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इसके अलावा, वोटिंग के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए मोबाइल डिपॉज़िट सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे मतदाता बूथ के पास ही जरूरी प्रक्रिया पूरी कर सकें।
चुनाव आयोग ने यह भी सुनिश्चित किया कि एक बूथ पर वोटर्स की संख्या अधिक न हो — इससे मतदान व्यवस्था सुचारू और भीड़-भाड़ से मुक्त रहे।
चुनाव के नतीजे और असर
2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में NDA को भारी सफलता मिली। 202 सीटों तक पहुंचकर उन्हें निर्णायक बहुमत मिला, जबकि महागठबंधन को अपेक्षाकृत कम सीटें मिलीं।
यह नतीजा सिर्फ बिहार की राजनीति के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम साबित हो सकता है क्योंकि बिहार एक बड़ा और महत्वपूर्ण राज्य है। NDA की यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी केंद्र सरकार के लिए एक मजबूत संकेत है।
निष्कर्ष: बिहार चुनाव 2025 क्यों मायने रखता है
बिहार चुनाव 2025 (Bihar Election 2025) सिर्फ एक राज्य स्तर का चुनाव नहीं है — यह राजनीतिक दिशा-निर्देश, विकास की प्राथमिकताएं और भविष्य की नीतिगत चुनौतियों का प्रतीक है।
• बेरोजगारी और युवा पलायन जैसे मुद्दे अभी भी गहराई से जुड़े हैं, और सरकारों के लिए जवाबदेही बनाते हैं।
• मतदाता सूची का संशोधन यह दिखाता है कि लोकतंत्र में पारदर्शिता कितनी महत्वपूर्ण है।
• विकास और कानून-व्यवस्था जैसे बुनियादी मुद्दे यह दर्शाते हैं कि जनता अब सिर्फ प्रचार नहीं देख रही, बल्कि असली बदलाव चाहती है।
• नए गठबंधन और पार्टियों का उदय यह संकेत देता है कि बिहार की राजनीति में पैटर्न बदल रहे हैं और पुरानी रणनीतियाँ हमेशा कारगर नहीं रहेंगी।