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UGC ने 2025-26 शैक्षणिक सत्र के लिए 101 विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग (ODL) की मंजूरी दी

UGC Approves 101 Universities for Online and Distance Learning in Academic Session 2025-2026

उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है भारतमे। UGC approves 101 universities for online and distance learning in academic session 2025-2026, जिससे लाखों छात्रों के लिए नए अवसर खुल गए हैं।
यह निर्णय डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और देश के हर कोने में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से UGC ने यह निर्णय लिया है । और विस्तार से चलिए जानिए यहा।

कौन-कौन से विश्वविद्यालयों को UGC की मंजूरी मिली भारत मे 2025-26 के लिए 

UGC द्वारा जारी आधिकारिक लिस्ट में देशभर के सरकारी, निजी और डिम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं।
कुछ प्रमुख विश्वविद्यालय जिनको अनुमति मिली है:

• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU)

• अमिटी विश्वविद्यालय (Amity University)

• सिम्बायोसिस सेंटर फॉर डिस्टेंस लर्निंग

• मणिपाल विश्वविद्यालय (Manipal University)

• चंडीगढ़ विश्वविद्यालय (Chandigarh University )

• लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU)

• भारती विद्यापीठ

• जैन विश्वविद्यालय (बेंगलुरु)

इन संस्थानों को UGC approves 101 universities for online and distance learning in academic session 2025-2026 के तहत अपने मौजूदा कोर्स के साथ नए प्रोग्राम शुरू करने की भी छूट दी गई है।

101 Universities को UGC ने ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग के लिए मंजूर दी ।
UGC 2025-26: 101 Universities अब ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग शुरू करेंगी।

 

विश्वविद्यालयों को ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग के तहत कौन-कौन से कोर्स उपलब्ध होंगे

UGC ने इन विश्वविद्यालयों को स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) स्तर के कई विषयों में ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग कोर्स चलाने की अनुमति दी है। इनमें शामिल हैं –

• बी.ए., बी.कॉम., बीबीए (B.A., B.Com., B.B.A)

• एमबीए, एम.कॉम., एम.ए.(MBA, M.Com,  M.A.)

• बीसीए, एमसीए (BCA, MCA)

• डिजिटल मार्केटिंग, डेटा साइंस, एजुकेशन और मैनेजमेंट

यह सभी कोर्स पूर्णतः ऑनलाइन डिस्टेंस मोड या हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन + ऑफलाइन) में उपलब्ध होंगे।

छात्रों के लिए लाभ

इस फैसले से विद्यार्थियों को कई फायदे होंगे:

• लचीलापन (Flexibility): कहीं से भी, किसी भी समय पढ़ाई की सुविधा।

• कम खर्च (Affordable Fees): ऑनलाइन कोर्स की फीस पारंपरिक शिक्षा से कम होती है।

• स्किल डेवलपमेंट (SKILL DEVELOPMENT): नए विषयों जैसे डेटा साइंस और डिजिटल मार्केटिंग में विशेषज्ञता हासिल करने का मौका।

• मान्यता प्राप्त डिग्री: सभी डिग्री UGC और AICTE द्वारा मान्यता प्राप्त होंगी।

• रोजगार अवसर: डिजिटल स्किल्स के कारण छात्रों के लिए नौकरी के अवसर भी बढ़ेंगे।

यह कदम भारत के “Digital India Education Vision” को भी मजबूती देता है।

UGC की आधिकारिक वेबसाइट से पूरी लिस्ट कैसे देखें

अगर आप यह जानना चाहते हैं कि आपका विश्वविद्यालय इस सूची में शामिल है या नहीं, तो ये स्टेप्स फॉलो करें:

• ugc.ac.in/deb पर जाएं

• “Approved Universities for Online and Distance Learning (2025-2026)” पर क्लिक करें

• PDF डाउनलोड करें और अपने संस्थान का नाम देखें

UGC ने यह भी स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं विश्वविद्यालयों के कोर्स वैध माने जाएंगे जो इस सूची में शामिल हैं।

UGC का आधिकारिक बयान

UGC के चेयरमैन ने कहा कि –

“हमारा उद्देश्य भारत को डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाना है। UGC approves 101 universities for online and distance learning in academic session 2025-2026 एक बड़ा कदम है, जिससे शिक्षा सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनेगी।”

भारत में डिजिटल एजुकेशन का भविष्य

भारत में डिजिटल एजुकेशन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन कोर्स में नामांकन करने वाले छात्रों की संख्या दोगुनी हो गई है।
अब UGC की नई मंजूरी से यह क्षेत्र और मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले 3 वर्षों में भारत का e-Learning Market 10 बिलियन डॉलरसे अधिक का हो जाएगा।

मुख्य बिंदु एक नजर में

101 विश्वविद्यालयों को मंजूरी – शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए

ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग – दोनों मोड में

UGC वेबसाइट पर लिस्ट उपलब्ध

छात्रों के लिए सस्ते और लचीले कोर्स

AI और डिजिटल स्किल्स पर जोर

निष्कर्ष

UGC approves 101 universities for online and distance learning in academic session 2025-2026 शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। भारत मे बढती हुई online digital learning के तहत यह फायदेमंद साबित हो सकता है।

इससे लाखों छात्रों को घर बैठे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
यह निर्णय न केवल छात्रों के लिए, बल्कि भारत की डिजिटल शिक्षा प्रणाली के लिए भी एक मील का पत्थर है।

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